5+ Moral Stories In Hindi For Class 9

Moral Stories In Hindi For Class 9

Hello all of you once again welcome to one another collection of moral stories in hindi.

Moral Stories In Hindi For Class 9

Today I am going to tell you moral stories in hindi for class 9. All the hindi stories which I am going to tell you all are interesting and learnable also.

So lets start with the interesting moral stories in hindi.

Hindi Stories For Class 9 with Moral


1. किसान का खजाना

Kisan Ka Khazana Hindi Moral Story

एक बार की बात है एक गांव में एक किसान रहता था। उस किसान के चार बेटे थे। चारों बेटे बहुत आलसी थे। वह अपने पिताजी की मदद नहीं करते थे इस कारण से किसान को अकेले ही पूरे खेत में फसल बोनी पढ़ती थी।

उसके चारों बेटे समय फालतू की बातों में व्यर्थ करते थे। यह बात उसके पिता को बेकार लगती थी। कई बार अपने बेटों को कहा कि वह परिश्रम करें लेकिन किसान की कही सारी बातें व्यर्थ गई क्योंकि उसके बच्चों पर उसके कहने का कोई प्रभाव ही नहीं पड़ा।

एक दिन किसान बहुत बुरी तरह बीमार पड़ गया। वह जानता था कि अब उसकी मृत्यु नजदीक है। वह अपने बच्चों को परिश्रम की अहमियत समझाना चाहता था अपने मरने से पहले। उसने अपने चारों बेटों को अपने पास बुलाया।

 किसान ने अपने बेटों से कहा - " देखो बच्चों बहुत समय पहले मेरे पिताजी ने मुझे एक सोने के सिक्के से भरा एक बक्सा दिया था। उस बक्से के चोरी हो जाने के डर से मैंने उसे अपने खेत में दफना दिया। मैं चाहता हूं कि तुम दोनों खेत में खुदाई करो और मेरे मरने के बाद उस बक्से को निकाल लो और उन सिक्कों से एक अच्छी जिंदगी जियो।"

कुछ दिन बाद किसान मर गया। उसके मरने के बाद उसके चारों बेटे फावड़ा और कुल्हाड़ी लेकर खेत में पहुंचे। उन्होंने उस खेत का एक-एक इंच खुदाई करके खोज डाला लेकिन कोई खजाना नहीं मिला। किसान के सभी बेटे बहुत दुखी हुए।

उसी समय वहां आदमी गुजर रहा था उस आदमी ने किसान के बेटों से कहा कि वह इतनी खुदाई कर चुके हैं अब वह इस खेत में ही गेहूं की फसल बो दे। किसान के बेटों ने ऐसा ही किया।

उस साल खेत में फसल बहुत ही अच्छी तथा अधिक मात्रा में हुई। अब किसान के बेटों को समझ आ गया था कि असली खजाना अधिक परिश्रम ही है और यही बात उन्हें सिखाना चाहते थे।

शिक्षा :-  अधिक परिश्रम ही सफलता की कुंजी है।


2. आलसी प्रजा

Hindi Story Class 9

एक बार एक समय एक राजा नदी के किनारे एक महल में रहता था। वह एक प्रसन्न राजा नहीं था क्योंकि उसकी प्रजा बहुत आलसी थी।

प्रत्येक समय वह अपने रथ में बाहर जाता, वह पत्थर और कूड़ा करकट सड़क पर पड़े हुए देखता था। प्रत्तयेक समय वह अपनी नावों से यात्रा करता था तो वह नदी को बहुत गंदा पाता था।

"मेरी प्रजा इतनी आलसी क्यों है?" वह दुखी होकर कहता था।"

" वे सड़कों को साफ क्यों नहीं रखते हैं।" उसने कुछ समय के लिए सोचा और कहा " मुझे अवश्य ही उन्हें एक सबक सिखाना चाहिए।"

 एक रात उसने सोने से भरा बैग लिया और मुख्य मार्ग की ओर चला गया उसके साथ उसका वजीर भी था। उसने सड़क के बीच में गड्ढा देखा और इसमें सोने को रख दिया, तब राजा और वजीर ने गड्ढे के ऊपर बड़ा पत्थर रख दिया।

अगले दिन एक व्यक्ति सड़क पर अपनी बैलगाड़ी में आया जो कोयले से भरी हुई थी। उसने एक बड़ा पत्थर सड़क के बीच में देखा परंतु इसके बारे में वह चिंतित नहीं था और उसने अपनी बैलगाड़ी को पत्थर की ओर से घुमा दिया।

तब , दूसरा आदमी अपने साथ भेड़ और बकरियों के झुंड को लेकर आया। पत्थर ने उसे भी चिंतित नहीं किया। वह अपने झुंड को लेकर पत्थर के दूसरी तरफ से चल दिया।

बहुत से दूसरे व्यक्ति भी उसी सड़क से गुजरे परंतु उनमें से सभी इतने आलसी थे कि उन्होंने पत्थर को दूर नहीं धकेला।

 इसलिए राजा ने अपनी प्रजा को वहां बुलाया अपने लंबे कोर्ट को उतारा और कहा, " आओ अपने-अपने कोट को उतारो, इस पत्थर को दूर धकेलते हैं।"

जब उन्होंने पत्थर को हटा दिया उन्होंने सोना देखा उन्होंने आश्चर्य से अपनी आंखों को रगड़ा।

राजा ने वजीर से कहा, " सोने को मेरे महल में ले जाओ। अपनी प्रजा की ओर मुड़ते हुए उसने कहा, " सोना यहां था परंतु तुम इतने आलसी थे कि पत्थर ना हटा सकें इसलिए कोई भी सोने के योग्य नहीं है। काश तुम सचेत होते और पत्थर हटा देते सोना तुम्हारा हो गया होता।" वहां उपस्थित प्रत्तयेक शर्मिंदगी और दुख भी कर रहा था।

राजा की प्रजा समझ गई और उसने सोने के लालच में ही रास्ते में पड़े किसी भी पत्थर को हटाने का निश्चय किया। इसके बाद राजा के प्रजा के सभी लोग परिश्रमी हो गए और राजा का राज्य सबसे साफ सुथरा राज्य हो गया।

शिक्षा :-  हमें कभी भी आलस नहीं करना चाहिए। हमें कठोर एवं अधिक परिश्रमी बनना चाहिए।


3. हरिश्चंद्र् की ईमानदारी

Moral Story For Class 9

राजा दशरथ से पहले, हरिश्चंद्र् नाम के राजा शासन करते थे। वह विद्वान, श्रेष्ठ, उदार, ईमानदार और सत्यवादी थे।

एक बार भगवान उनकी सत्यवादीता की परीक्षा लेना चाहते थे, उन्होंने ऋषि विश्वामित्र को भेजा। ऋषि विश्वामित्र उनके पास गए और कहा " हे राजा, मैं तुम्हारी इस पूरी राजधानी को चाहता हूं।"

 राजा इतने उदार थे कि उन्होंने अपनी पूरी राजधानी उन्हें दे दी।

परंतु विश्वामित्र ने कहा, " तुम्हें दक्षिणा के रूप में इसके ऊपर एक हजार सोने के सिक्के अवश्य देने चाहिए।"

राजा  हरीशचंद्र ने कहा " मुनिवर ,  मैं क्षमा चाहता हूं तू मेरे पास जो भी था मैंने वह सब कुछ आपको दे दिया। कृपया आप मुझे कुछ दिनों का समय दे दे मैं इतने दिनों में धन कमाकर आपको आपकी दक्षिणा अवश्य दे दूंगा।

ऋषि ने कहा " ठीक है,  मैं तुम्हारे दक्षिणा की प्रतीक्षा करूंगा। यह कहकर ऋषि वहां से चले गये।"

बिना कुछ लिए हरीश चंद्र ने शहर छोड़ दिया। वे अपनी पत्नी चंद्रवती और बेटे रोहिताश के साथ गए।

काशी पहुंचे वहां हरिश्चंद्र ने अपनी पत्नी को गृहस्ती के कार्य के लिए एक व्यापारी को बेच दिया और साथ में उनका बेटा रोहिताश को भी।

उन्होंने स्वयं को एक ऐसे व्यक्ति को बेच दिया जो शवों को जलाया करता था। जो नदी के घाट पर आते थे हरिशचंद्र को उसके सहायक के रूप में कार्य करना पड़ता था। इसी प्रकार उन्होंने ऋषि को उनकी दक्षिणा देने के लिए धन कमा लिया।

एक दिन रोहिताश को एक सांप ने काट लिया जब वह खेल रहा था। हरिश्चंद्र का लड़का रोहिताश मर गया, चंद्रावती बहुत चिल्लाई वह उसे दाह संस्कार के स्थान पर ले गई।

हरीशचंद्र उस समय कार्य पर थे। देर शाम थी उन्होंने एक दूसरे को नहीं पहचाना, जब उन्होंने एक दूसरे को पहचाना वह रोए, उनके पास दाह संस्कार के लिए अदा करने के लिए कोई धन नहीं था।

उन्हें फीस के रूप में कपड़े का टुकड़ा मालिक को देना था। हरिश्चंद्र अपने कपडे का एक भाग फाड़ने लगे। शीघ्र ही भगवान प्रकट हो गए। वे हरिश्चंद्र की ईमानदारी और सत्यवादी पर बहुत प्रसन्न थे। उन्होंने उन्हें सब लौटा दिया।

हरिश्चंद्र के इस कार्य ने उन्हें प्रसिद्ध बना दिया इसलिए वह सत्यवादी हरिश्चंद्र के रूप में जाने गए।

4. झूूठा लड़का

Story In Hindi For Class 9

एक बार एक गांव में एक लड़का रहता था। उस लड़के के पास कई सारी भेड़े थी। वह उन भेड़ों को चराता था और अपना जीवन पोषण करता था। वह उन भेड़ों को रोज घास चराने चारागाह पर ले जाता था।

वह लड़का काफी झूठ बोलता था और लोगों के साथ काफी अधिक मजाक करता था। वह किसी भी व्यक्ति से  लड़कर बात करता था।

एक बार वह अपनी भेड़ों को लेकर चारागाह में चऱा रहा था। उसे मजाक करने की सूझी वह जोर-जोर से चिल्लाने लगा "शेर आया शेर आया शेर आया मुझे बचाओ शेर मुझे खा जाएगा मुझे बचाओ शेर मुझे खा जाएगा।"

यह चिल्लाहट की आवाज सुनकर आसपास के लोग उसे बचाने के लिए वहां पहुंच गए। वहां लोगों के पहुंचने पर लोगों ने देखा कि वहां तो कोई शेर है ही नहीं  और लड़का भी खूब तेज हंसने लगा।

वहां खड़े लोगों में से एक आदमी ने पूछा - " क्या हुआ शेर कहां है तुम क्यों चिल्ला रहे थे।"

उस लड़के ने कहा - " यहां तो कोई शेर नहीं आया था मुझे तो बस मजाक करने की सूझी इसलिए मैंने ऐसा चिल्ला दिया।"

कुछ दिनों बाद एक बार फिर वह लड़का अपनी भेड़ों को चरा रहा था। उसने सोचा आज गांव वालों को फिर से परेशान किया जाए।

लड़का फिर जोर जोर से चिल्लाने लगा "बचाओ बचाओ मुझे बचाओ शेर आ गया मुझे बचाओ नहीं तो शेर मुझे खा जाएगा।"

यह सुनकर आसपास के लोग फिर से वहां पहुंच गए। उन्होंने फिर देखा कि वहां कोई शेर नहीं है। उन्होंने लड़के से फिर पूछा कहां है शेर।

लड़के ने कहा " यहां कोई भी शेर नहीं आया था मैं तो यहां अकेले बैठा हुआ था और कोई काम भी नहीं था। इसलिए मैंने सोचा कि आप लोगों के साथ थोड़ा मजाक किया जाए।"

कुछ दिनों बाद वह लड़का अपनी सभी भेडों को लेकर चारागाह में उन्हें चरा रहा था। तभी अचानक वहां पर एक सचमुच का शेर आ गया।

वह लड़का जोर-जोर से चिल्लाने लगा बचाओ शेर आ गया शेर आ गया यह मुझे खा जाएगा मुझे बचाओ।

इस बार उसकी आवाज सुनकर कोई उसे बचाने नहीं आया। आसपास के सभी लोगों को यही लग रहा था कि यह लड़का फिर से मजाक कर रहा है।

लड़का तो भाग गया लेकिन शेर ने उसके कई सारी भेड़ों को खा लिया और उस लड़के को बहुत अधिक पैसों का नुकसान हुआ।

उस लड़के को अब उसकी गलती का पछतावा हो गया कि उसे ऐसे लोगों के साथ मजाक नहीं करना चाहिए और कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए।

वह अपनी गलती का पछतावा करते हुए यह सोच रहा था कि काश मुझे यह गलती पहले समझ में आ गई होती तो मेरी भेड़ें अभी सही सलामत रहती।

शिक्षा -  हमें कभी भी झूठ नहीं बोलना चाहिए और किसी का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।


5. घमंडी बारहसिंघा

एक बार आंध्र प्रदेश के सुंदर जंगल में एक बारहसिंगा रहता था। उसके एक प्यारा सिंह का जोड़ा था। उसे अपनी सिंगो पर बहुत गर्व था। वह तालाब के प्रतिबिंब मैं अपनी प्रशंसा किया करता था।

लेकिन अपनी कुरूप टांगों पर बहुत शर्मिंदा था।

एक सिंगर तालाब पर पानी पी रहा था तो उसने कुछ कुत्तों को भोंकते हुए सुना। वह जान गया की शिकारी चारों ओर थे।

वह अपने जीवन के लिए दौड़ा , " मुझे कहीं पर छिपना चाहिए।" भय मैं बारहसिंगा लड़खड़ाया और उसके सिंग कुछ सूखी शाखाओं में उलझ गए।

उसने स्वयं स्वतंत्र होने के लिए कठिन प्रयत्न किया परंतु कुत्ते उसके पास पहुंच गए। उसने कठिन प्रयास किया और उसके सिंंगों से उसे चोट पहुंची।

अंत में बहुत कठिनाई के साथ उसने शाखाओं से अपने आप को स्वतंत्र कर लिया, इतनी तेज दौड़ा जितना उसकी टांगे उसे दौड़ा जा सकती थी।

शिक्षा :-  पतन से पूर्व घमंड नष्ट हो जाता है।

Hope you all like this moral stories in hindi. Stay tuned with us for more hindi stories with moral like this.

Meet you in the next article with some other interesting stories in hindi.

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