Moral Stories in Hindi For Class 8

Moral Stories In Hindi For Class 8

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Moral Stories In Hindi For Class 8

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Hindi Stories For Class 8 With Morals

1. चंदन का पेड़ ( Hindi Stories For Class 8)

Chandan Ka Tree Hindi Story For Class 8

महेशपुर नामक गांव में एक किसान रहता था उसके दो बेटे थे महेश और रमेश। उसके छोटे बेटे का नाम महेश था और बड़े बेटे का नाम रमेश।

बड़े रमेश का पढ़ाई में मन नहीं लगता था तो पिताजी ने उसे एक साइकिल खरीदी थी। रमेश की साइकिल देखकर महेश को जलन होने लगी उसने अपने पिता से जीत की कि वह उसे मोटर गाड़ी खरीदें। 

उस किसान को अपने छोटे बेटे की जिद के आगे हार माननी पड़ी और उसने उसे गाड़ी खरीदी।

कुछ दिनों बाद जब किसान ने देखा कि उसका बड़ा बेटा पढ़ाई लिखाई में अब एकदम बेकार हो चुका है और वह आगे पढ़ने लायक नहीं है। किसान ने अपने बड़े बेटे की शादी कर दी।

 उनका बड़ा बेटा बहुत मेहनती था वह खेती बारी करता था और परिवार का गुजर-बसर करता था।

पढ़ाई खत्म होने के बाद छोटे बेटे महेश ने अपने पिता से शहर में पढ़ने की मांग की।

किसान ने कहा " बेटा शहर में पढ़ने से क्या होगा झूठ मूठ का अधिक खर्चा भी लगेगा गांव में भी कॉलेज हैं तुम यहीं पर पढ़ लो।"

महेश ने अपने पिता से कहा " नहीं मुझे शहर में ही पढ़ना है आप मुझे शहर में पढ़ने के लिए भेजिए वरना मैं खाना नहीं खाऊंगा।"

किसान को अपने छोटे बेटे महेश की जिद माननी पड़ी और उसने उसे शहर में पढ़ने के लिए भेज दिया। शहर की चकाचौंध में महेश का पढ़ाई में बिल्कुल मन नहीं लगता था वह इधर-उधर घूमता रहता, फिल्में देखता, अपने दोस्तों के साथ घूमा करता था।  

इसी तरह महेश ने 2 साल बर्बाद कर दिए। एक दिन किसान के बड़े बेटे रमेश ने महेश को फोन किया और कहा कि तुम जल्दी से घर आ जाओ पिताजी की तबीयत बहुत खराब है।

छोटे बेटे महेश ने कहा " मैं अभी नहीं आ सकता हूं मुझे बहुत काम है।" कुछ दिनों बाद किसान की मृत्यु हो गई।

1 दिन छोटे बेटे महेश ने रमेश को फोन किया और कहा कि " आप इतने कम पैसे क्यों भेज रहे हैं आप तो जानते ही हैं कि शहर में कितने खर्चे होते हैं।"

बड़े बेटे रमेश ने कहा " इस बार खेती भी अच्छी नहीं हुई इसलिए ही कम पैसे थे मुझसे जितना हो पा रहा है मैं तुम्हें पैसे भेज रहा हूं।"

कुछ दिनों बाद छोटा बेटा महेश शहर से आया। महेश को देखकर रमेश ने कहा- " बड़े दिनों बाद महेश वह भी बिना बताए।"

महेश ने कहा " हां मुझे थोड़ा काम था इसलिए बिना बताया आ गया।"

महेश ने रमेश को एक कागज दिया और कहा की यह मेरे कॉलेज का कागज है इस पर आपके हस्ताक्षर चाहिए।

रमेश ने महेश पर विश्वास करके हस्ताक्षर कर दिए।

इसके बाद महेश हंसने लगा उसने रमेश से कहा  की " अब वह अपनी पत्नी को लेकर वहां से निकल जाए। उसने रमेश को बताया कि जिस कागज पर उसने अभी हस्ताक्षर किए हैं उस पर अंग्रेजी में लिखा हुआ था कि रमेश अपनी सारी जायदाद महेश को देता है।"

इस प्रकार महेश ने रमेश को धोखा दिया। रमेश बहुत दुखी हुआ और वह अपनी पत्नी को लेकर वहां से निकल गया। रास्ते में ही उसने एक झोपड़ी बांध ली।

रमेश की पत्नी ने कहा " अब हम लोगों का क्या होगा अब हम लोग कहां से खाएंगे और जिएंगे।"

रमेश बोला परेशान मत हो मैं जंगल में जाऊंगा लकड़ियां काट लूंगा और उसे बेचकर मुझे जो पैसे मिलेंगे उससे हम लोग गुजर-बसर करेंगे।

अगले दिन रमेश जंगल में गया उसने लकड़ियां काटना प्रारंभ किया। काफी देर तक लकड़ियां काटने के बाद बहुत थक गया और उसे प्यास लग गई। वह पानी की तलाश में इधर-उधर घूमने लगा तभी कुछ दूर पर उसे कुआं दिखा वह वहां पर गया।

कुए पर जाने रमेश ने महसूस किया कि कुएं से बहुत ही अच्छी सुगंध आ रही है। उसने देखा तो कुएं में पानी नहीं था। वह कुआं सूखा हुआ था परंतु वहां पर एक चंदन का पेड़ था।

रमेश ने सोचा कि " मैंने सुना था कि चंदन की लकड़ियां बहुत ही महंगी बिकती हैं। रमेश तुरंत कुएं में कूद गया। अंदर जाने के बाद उसने चंदन की लकड़ीया काटी और ले जाकर उसे बाजार में बेच दी। उन लकड़ियों को बेचने के उसे ₹50000 मिले।" रमेश बहुत खुश हुआ और वह अपने घर गया।

अगले दिन फिर से रमेश ने चंदन की लकड़ीया काटी और उसे बाजार में भेज दिया। इस तरह कुछ दिनों तक करने के बाद रमेश के पास खूब सारे पैसे हो गए। इन पैसों से रमेश ने खुद का अपना घर खरीद लिया, खेत खरीद लिए और एक ट्रैक्टर भी खरीद लिया।

दूसरी तरफ महेश को खेती करने आता ही नहीं था। वह उन खेतों से कोई पैसा नहीं कमा पा रहा था। उसकी हालत एकदम खराब हो गई थी उसके पास खाने के पैसे भी नहीं थे।

महेश ने अपने सारे खेत रमेश को बेच दिए। खेत बेचने के बाद महेश को जो पैसे मिले उसे से महेश का कुछ दिन तक जीवन चला परंतु पैसे खत्म होने के बाद उसके पास खाने के लिए कुछ नहीं था। उसकी हालत बहुत ही दयनीय हो गई थी।

एक दिन रात को महेश जाकर रमेश की खिड़की से देखने लगा। उसने देखा कि रमेश और उसकी पत्नी खाना खा रहे थे। महेश ने उन दोनों को बात करते हुए सुना कि आज वह जो कुछ भी हैं जो भी उनके पास धन है वह सिर्फ जंगल में मौजूद चंदन के पेड़ की लकड़ियों के वजह से हैं।

महेश समझ गया कि कल से वह भी जाएगा जंगल में और चंदन की लकड़ियों को लाकर बेच कर पैसे कमाएगा। 

अगले दिन जब महेश जंगल में गया उसे खूब खोजने के बाद वह कुआं मिला। उसने देखा कि अंदर चंदन का पेड़ था और कुआं एकदम सूखा हुआ था। महेश तुरंत कुएं में कूद गया।

महेश बहुत खुश हुआ। जैसे ही वह चंदन के पेड़ को काटने के लिए छुआ वह पेड़ गायब हो गया और अचानक कुएं में पानी भर गया पानी में डूब कर महेश की मृत्यु हो गई।

शिक्षा:- 1.हमें कभी भी किसी को धोखा नहीं देना चाहिए।


2.हमें हमेशा बड़ों की इज्जत करनी चाहिए तथा पैसों का घमंड नहीं दिखाना चाहिए


2. कटोरी का लालच ( Stories in Hindi For Class 8 )

Pyase Ka Lalach Hindi Kahani

एक बार की बात है एक लकड़हारा था। वह जंगल में लकड़ियां काटने के लिए गया। उस दिन वह अपने घर से पानी ले जाना भूल गया था। दोपहर में धूप हो गई और लकड़िया काटते काटते हैं उसे प्यास लग गई।

वह लकड़हारा पानी की तलाश में पूरे जंगल में घूमने लगा। उसे पानी का कोई ठिकाना नहीं मिला ना तो कोई कुआं और ना ही कोई नदी। अंत में हार कर थक कर वह आकर एक पेड़ के नीचे बैठ गया।

कुछ देर बाद उसे आवाज सुनाई दी। उसे आवाज से पता चला कि आस पास जरूर कोई नदी है उसे आवाज नदी के पानी की बहने की सुनाई दी थी।

लकड़हारा उस नदी के आवाज का पीछा करते हुए आगे बढ़ता गया। काफी दूर तक चलने के बाद उसने देखा कि वहां पर एक नदी बह रही थी। उसने सोचा कि मैं यहां से पानी पीकर अपनी प्यास बुझा लूंगा।

जब वह नदी के पास पानी पीने के लिए गया उसने सोचा कि क्यों ना मैं पत्ते से एक कटोरी बनाना उसे आसान रहेगा। उसने देखा कि सामने एक पेड़ था उसने वहां से पेड़ के पत्ते लिए और उसे कटोरी बना ली।

कुछ देर बाद उसने सोचा एक लोहे का कटोरा हो जिससे मैं पानी पी सकूं। आसपास वह लोहे की कटोरी खोजने लगा तभी उसे सामने एक लोहे का कटोरा मिल गया।

अब उसके मन में और इच्छा जागी उसने सोचा कि क्यों ना एक पीतल का कटोरा होता जिससे मैं पानी पीता। वह  पीतल के कटोरे के खोज में कुछ दूर आगे गया। काफी आगे तक चलने के बाद उसे पीतल का कटोरा मिल गया।

अब उस लकड़हारे ने सोचा लगता है या कोई मायावी जंगल है यहां पर जो मांगो वह पूरा हो जाता है। लकड़हारे ने सोचा कि काश मुझे एक चांदी का कटोरा मिल जाता है जिससे मैं पानी आसानी से पी लेता। 

वह चांदी की कटोरी की खोज में भ्रमण करने लगा काफी दूर तक चलने के बाद उसे एक चांदी का कटोरा पेड़ के पीछे मिला।

जब लकड़हारे को चांदी की कटोरी मिल गई तू उसके मन में और अधिक लालच आया। ने सोचा कि अगर यहां पर चांदी की कटोरी है तो जरूर ढूंढने पर मुझे सोने की कटोरी भी मिल जाएगी।

लकड़हारा और सोने की कटोरी को ढूंढने लगा। वह बहुत दूर तक ढूंढते हुए चला गया। उसके पैरों में छाले पड़ गए परंतु वह हार नहीं माना। लकड़हारे ने सामने पड़ी एक डंडी उठाई और उसके सहारे ही चलने लगा।

काफी दूर तक जाने के बाद उसे सोने की कटोरी भी मिल गई। लकड़हारे ने सोचा अब मैं सोने की कटोरी ले लिया और अब वह सोचा कि अब मैं जा कर नदी में आराम से सोने की कटोरी से पानी पी लूंगा।

लेकिन लकड़हारा सोने की कटोरी की तलाश में उस नदी से बहुत ही अधिक दूर चला गया था। लकडहारे को बहुत तेज से प्यास लग रही थी और उसे चक्कर भी आ रहा था। वह किसी तरह चलता रहा सोने की कटोरी को लेकर।

नदी के पास तक पहुंचने के बाद वह इतना थक गया था कि उसे चक्कर आ गया और वह गिर गया। लकड़हारा गिरने के बाद भी उस सोने की कटोरी को अपने हाथ में पकड़ा ही रहा।

उसे गिरा हुआ देखकर नदी में से हंसने की आवाज आई और नदी ने उस लकड़हारे से बोला तू कितना बेवकूफ है पानी पीने के लिए तो तेरे दोनों हाथ ही काफी थे मगर तू लालच के वजह से इतना दूर गया सोने के कटोरी को पाने के लिए। अब तू देख तेरे पास सोने की कटोरी तो है परंतु तू पानी पीने लायक नहीं है।

लकड़हारा थका हुआ था कि वह बेहोश हो गया और पानी ना पीने के वजह से उसकी वहीं पर मृत्यु हो गई।

शिक्षा :-  हमें लालच नहीं करना चाहिए जो हमारे पास है वह बहुत है। 


3. तोता और कौआ ( Class 8 Hindi Tales )

Parrot And Crow Hindi Story For Class 8

एक तोता था। वह हरे रंग का था और उसकी लाल चोंच थी। उसे उड़ना बहुत पसंद था। एक दिन तोता ऊंचा उड़ रहा था। वह जंगल के पास से उड़ रहा था। उसने नीचे एक आम के पेड़ को देखा।

उस आम के पेड़ की शाखाओं से प्यारे पीले आम लटक रहे थे। तोते के मुंह में पानी भर गया। तोते को आम बहुत पसंद थे। तोते ने आम पाने के लिए सोचा। 

तोते ने स्वयं से कहा, " मैं एक बड़ा रस भरा आम चाहता हूं। मैं बहुत देर से उड़ते हुए थक गया हूं। इस तरह मैं आम को खाते हुए आराम कर सकता हूं।"

तोता पेड़ पर नीचे उतरा। वह शाखा पर बैठने ही वाला था कि उसने सुना "  कौवे यहां से चले जाओ यह मेरा पेड़ है।" तोते को आश्चर्य हुआ कि यह कौन हो सकता है।

तोते ने इधर उधर नजर दौड़ाई तभी उसने एक बड़े काले कौवे को देखा। काला कौवा आवाज कर रहा था। " कांव! , कांव! जाओ यहां से इस पेड़ पर मत बैठो।

कौवे की आवाज बहुत तीखी और कठोर थी। तोता नाराज कौए को देठ कर डर गया। इसके बाद तोता वहां से निराश होकर उड़ गया।

जैसे ही तोता उड़ा वह पार्क की ओर गया। उसने पार्क में एक पेड़ की शाखा में एक लाल रंग के गुब्बारे को फंसा हुआ देखा। तोते की मन में एक विचार आया। उसने गुब्बारे की डोर पकड़ी और आम के पेड़ की तरफ ऊंचा उड़ा।

तोते ने कौवे को वही पेड़ पर बैठा देखा जहां उसने छोड़ा था। जैसे ही कौवे ने तोते को देखा उसने दुबारा कांव-कांव शुरु कर दिया। तोते ने कौवे के ऊपर वाली बहुत ऊंची शाखा का चुनाव किया और वहां पर जाकर बैठ गया।

तोते ने अपनी चोंच से गुब्बारे को मारा। एक जोरदार आवाज के साथ धमाका हुआ असल में गुब्बारे को चोंच से मारने की वजह से गुब्बारा फट गया। आवाज से कौवा बहुत डर गया और वह उस पेड़ से उड़ गया।

तोता अपनी योजना से बहुत खुश था। वह स्वयं पर हंसा। सारी रसदार आम का मजा स्वयं लेने का उसको अच्छा समय मिल गया था। वह कौवे को भगाने की अपनी कुशल योजना पर बहुत खुश था।

शिक्षा :-  यदि तुम कोई उद्देश्य नहीं रखते हो तो किसी को भी नहीं हरा पाओगे।


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