Top 5 Hindi Stories In 2020

Hindi Stories in 2020

Hello friends welcome again on my learning blog. Toady we are going to tell you about 5 hindi stories which you can read in 2020. 

Hindi Stories in 2020


This are so much inspiring, learning and interesting stories in hindi. 

So let's start the journey of best hindi stories in 2020. 

5+ Hindi Stories To Read In 2020


1. तेनालीराम की बुद्धि ( Hindi Stories in 2020 )

विजयनगर के सेनापति के पुत्र हुआ। उसने राजा कृष्णदेव राय और उनके दरबारियों को भोजन के लिए आमंत्रित किया अपना पुत्र होने की खुशी में। राजा और उनके दरबारी नवजात शिशु को आशीर्वाद देने पहुंचे।
Tenali Rama Story in Hindi

राजा बच्चे के पास गए और कहा , " भगवान तुम्हें दीर्घायु दे। ईश्वर करें तुम अपने पिता की तरह एक महान योद्धा बनो।"

तेनाली रमन बुद्धिमान और हाजिर जवाब दरबारी पास में खड़ा था। उसने कहा , " महाराज जी अपने पिता से भी महानतम योद्धा होगा।"

राजा ने तेनालीरमन से पूछा , " तुमने कैसे पता लगाया?" तेनाली रमन ने उत्तर दिया , " मैं उसको देख कर पता लगा सकता हूं।"

कुछ ईर्ष्यालु दरबारियों को तेनाली रमन को अपमानित करने का मौका मिल गया। उसमें से एक ने कहा, " महाराज तेनाली रमन कैसे घोषणा कर सकता है कि बच्चा बड़ा होकर क्या करेगा? "

राजा ने कहा , " हां , तुम सही हो मैं सोचता हूं हमें उसकी परीक्षा लेनी चाहिए। क्या तुम मुझे कोई सलाह दे सकते हो? "

दूसरे दरबारी ने कहा ,  " हां महाराज मेरे पास परीक्षा देने के लिए एक विचार है। हम दो एक सामान सोने के बर्तन बनाने का आदेश देंगे। एक ठोस सोने का होगा और दूसरा खोखला होना चाहिए।"

इसके बाद हम दोनों बर्तनों को एक समान जंजीरों से छत में बांध देंगे। तब हम तेनाली रमन को दूर से दिखाएंगे। हम उससे बिना छुए पहचानने के लिए कहेंगे कि कौन सा बर्तन खोखला है और कौन सा ठोस ?

राजा कृष्णदेव राय ने अपने नौकरों से परीक्षा के लिए सभी प्रबंध करने को कहा। इसलिए दो सोने के बर्तन सुनार द्वारा बनवाकर मंगवाई गए। उन्हें तेनाली रमन को दिखाने और पहचानने के लिए जंजीर से छत से लटका दिया गया।

इसके बाद तेनाली रमन को बुलाया गया। राजा ने उससे बताने के लिए कहा कि कौन सा बर्तन खोखला है और कौन सा बर्तन ठोस है।

तेनाली ने कहा , " महाराज एक जो दाएं तरफ है वह ठोस सोने का है और दूसरा बाई तरफ जो है वह खोखला है। "

राजा और दरबार में उपस्थित सभी लोग तेनाली रमन के सही उत्तर से आश्चर्यचकित थे। राजा ने उनसे पूछा , " तेनाली तुमने इतनी दूर से बिना छुए हुए सही कैसे बता दिया? "

तेनाली ने उत्तर दिया " महाराज मैंने निरक्षण किया कि एक बर्तन में बंधी हुई जंजीर इसके वजन के कारण तनी हुई थी और दूसरा जो खोखला और हल्का बर्तन था हवा में धीरे-धीरे डोल रहा था।"

इसलिए मैंने इतना देखकर आसानी से पता लगा लिया तनी हुई जंजीरवाला ठोस सोने का बर्तन है और हवा में डोलने वाला खोखले सोने का।"

तेनाली रमन की न्याय कुशलता से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा , " हां तेनाली अब मैं तुमसे सहमत हूं कि तुम देख कर सही न्याय कर सकते हो।" 

2. गंगा की कहानी ( Moral Stories in 2020)

मनुष्य, पौधों और जानवरों को पानी की आवश्यकता होती है। इसलिए लोग कस्बे और गांव नदियों के किनारे बनाते हैं। वह नदियों के पानी से फसल और पेड़ उगाते हैं और जानवरों को पालते हैं।
Hindi Kahani 2020

 यहां भारत में हमारे देश में बहुत ही लंबी और खूबसूरत नदियां हैं। इन सबमें से गंगा सबसे प्रसिद्ध नदी है। हमारे देश में मनुष्य इसे प्रेम करते हैं और इसकी पूजा की जाती है।

गंगा गोमुख से अपना जीवन आरंभ करती है। गोमुख हिमालय में बर्फ की बनी हुई एक गुफा है।जब बर्फ पिघलती है और पानी बन जाती है। यही पानी छोटी धाराओं में बहता है।

जब गंगा हिमालय से वहां के नीचे आती है ज्यादा से ज्यादा छोटी धाराएं उसमें मिल जाती हैं। इसलिए गंगा बड़ी और बड़ी होती जाती है। वह पर्वतों से बहुत तेजी से नीचे आती है। मैदान तक पहुंचते-पहुंचते गंगा विस्तृत और विस्तृत हो जाती है।

मैदानी क्षेत्र में वह हरिद्वार पहुंचती है। हरिद्वार उत्तराखंड प्रदेश में स्थित है। मैदानी भागों में वह भारत के बहुत से गांवों और कस्बों के बीच से होकर बहती है। उसके दोनों किनारों पर हरे भरे खेत हैं।

मैदान क्षेत्र में बहुत सी नदियां गंगा से मिलती हैं। यमुना और सरस्वती गंगा में इलाहाबाद में मिलती है। इलाहाबाद को अब प्रयागराज के नाम से जाना जाता है और यह उत्तर प्रदेश में स्थित है।  इन तीन नदियों के मिलने के स्थान को त्रिवेणी संगम कहते हैं। यह तीर्थ राज प्रयाग भी कहलाता है और यह बहुत धार्मिक जगह है।

बहुत से बड़े शहरों को पार करने के बाद गंगा समुद्र की तरफ जाती है। वह धीरे और धीरे बहती है। जैसे-जैसे वह समुद्र के करीब और करीब पहुंचती है। अंतरिम रूप में यह समुद्र में गिर जाती है।

गंगा की यह लंबी यात्रा ऊंचे पर्वतों से शुरू होकर अंत में बंगाल की खाड़ी में जाकर समाप्त होती है। वह स्थान जहां गंगा समुद्र में जाकर मिलती है गंगासागर कहलाता है और यह कोलकाता में स्थित है।

3. ईमानदार जूते वाला ( Stories For Kids In hindi In 2020 )

एक बार की बात है देवगढ़ नामक गांव में मोनू नाम का एक आदमी रहता था। मोनू एक जूते बनाने वाला मोची था। मोनू दिन भर मेहनत से अपने जूते की दुकान पर काम करता और पैसे कमाता था।
Honesty Moral Story


मोनू की पत्नी घर का सारा काम करती थी और घर का काम खत्म हो जाने के बाद वह मोनू के दुकान पर उसके काम में मदद भी करती थी। 

दोनों के मेहनत करने के बाद जो पैसे इकट्ठा होते थे उसे पति और पत्नी अपने बेटे राजू की पढ़ाई में इस्तेमाल करते थे।

मोनू का सपना था कि उसका बेटा एक बड़े से स्कूल में पढ़े परंतु वह जितने पैसे कमाता था उसमें उसका बच्चा राजू एक साधारण प्राथमिक विद्यालय में ही पड़ सकता था। मोनू हमेशा सोचता था कि 1 दिन मेरा भी बेटा जरूर बड़े से स्कूल में पढ़ेगा।

मोनू वैसे ही कम पैसे कमाता था और जब भी उसके दुकान पर कोई आता था मोनू जितना दाम कहता था वह ग्राहक उसमें भी भाव तोल करने लगता था और मोनू को हमेशा अपने हक से कम पैसे मिलते थे।

एक बार की बात है मोनू के दुकान पर एक सुंदर सा लेडीज स्लीपर रखा हुआ था। एक औरत ने आकर मोनू से कहा कि वह कितना सुंदर स्लीपर है इसका दाम कितना है।

मोनू ने उत्तर दिया " मालकिन सिर्फ ₹50 है इस लेडी स्लिपर का दाम। "

इसके बाद उस औरत ने कहा " अरे बाप रे स्लीपर का दाम ₹50 बहुत महंगा है मैं तो तुम्हें सिर्फ ₹30 ही दूंगी।"

मोनू ने विनम्र भाव से कहा " माल मुझे इसकी लागत ही ₹35 पड़ी है तो मैं आपको ₹30 में कैसे दे दूं।"

उस औरत ने फिर से उत्तर दिया की " मैं तो तुम्हें सिर्फ ₹40 दे सकती हूं उससे ₹1 अधिक मैं नहीं दूंगी।"

मोनू सोचने लगा कि अगर उसने यह चप्पल नहीं भेजी तो आज उसके परिवार को भूखा ही सोना पड़ेगा। इसलिए उसने उस मालकिन से कहा ठीक है मालकिन चप्पल ले लीजिए और मुझे ₹40 दे दीजिए। 

इस तरह मोनू को हर बार अपने लागत और अपने हक से कम पैसे मिला करते थे परंतु मजबूरी में उसे वह कम पैसे में ही अपना काम करना पड़ता था। ऐसा ही रोज रोज चलता गया।

एक दिन मोनू की चप्पल की दुकान पर एक सेठजी आए है। सेठ जी का चप्पल टूट गया था। सेठ जी ने मोनू से कहा - " मोनू मेरे चप्पल टूट गया है तुम इसे जरा बना दो। "

मोनू ने कहा सेठ जी आप बस 10 मिनट इंतजार कीजिए मैं अभी से बना देता हूं। इसके बाद मोनू उस चप्पल को ठीक करने में लग गया।

 सेठ जी अपने साथ एक बक्सा लेकर आए थे उन्होंने बक्सा रख दिया और वहीं मोनू की दुकान के पास एक स्टूल पर बैठ गए।

कुछ देर बाद मोनू ने चप्पल बना दी और मोनू ने सेठ जी को चप्पल दे दी। इसके बाद सेठ जी ने पूछा कितने रुपए हुए मोनू। मोनू ने कहा ₹5 सेठ जी। सेठ जी बोले इतना ज्यादा मैं तो सिर्फ तुम्हें तीन ही रुपए दूंगा। मोनू ने व ₹3 ले लिए।

इसके बाद सेठ जी वहां से चले गए। सेठ जी के जाने के बाद मोनू ने देखा कि सेठ जी अपना लाया हुआ बक्सा वही भूल गए हैं।

 मोनू को एक सेकेंड के लिए लालच आया कि इसमें पैसे हो सकते हैं मैं इसे रख लेता हूं लेकिन फिर मोनू ने सोचा कि यह मेरे पैसे नहीं है मैं इसे नहीं रखूंगा मैं सेठ जी को यह बकसा वापस लौटा दूंगा।


मोनू सेठ जी को ढूंढते हुए निकल पड़ा। आगे जाने के बाद मोनू को सेठ जी एक हलवाई की दुकान पर मिले सेठ जी हलवाई की दुकान पर गुलाब जामुन खा रहे थे।

इसके बाद उन्होंने सेठ जी उनका बक्सा लौटा दिया सेठ जी बहुत खुश हुए उन्होंने कहा मोनू मैंने तो तुमको कम पैसे दिए थे लेकिन फिर भी तुमने मेरा बक्सा मुझे लौटा दिया क्या तुम्हें थोड़ी सी भी लालच नहीं आया।

मोनू ने विनम्र भाव से सेठ जी को कहा " मुझे लालच तो आया था लेकिन फिर मैंने सोचा कि यह बकसा मेरा नहीं है यह जिसेके हैं मैं उसे लौटा दूंगा। "

मोनू ने सेठ जी को बक्सा दे दिया। सेठ जी ने कहा मोनू यह बक्सा मेरे लिए बहुत ही उपयोगी है। इसमें लाखों करोड़ों के हीरे और जेवर रखे हुए हैं। अगर यह बक्सा खो जाता तो मेरा बहुत ही बड़ा नुकसान हो जाता और मैं सड़क पर भीख मांगने लायक हो जाता।

इसके बाद सेठ जी ने मोनू से पूछा बताओ मोनू तुम्हें क्या इनाम में चाहिए तुम जो मांगोगे मैं तुम्हें वह दूंगा ही।

मोनू ने कहा नहीं नहीं सेठ जी मुझे कुछ नहीं चाहिए।

सेठ जी ने कहा " नहीं ऐसा मत बोलो तुम्हें कुछ तो इनाम में मुझसे लेना ही पड़ेगा बताओ तुम्हें क्या चाहिए। "

मोनू सोचने लगा कि वह क्या मांगे तभी उसके दिमाग में अपनी सोच की बात आई कि वह चाहता था कि उसका बेटा एक बड़े स्कूल में पढ़े वही सामने ही वही स्कूल था तो वह उसी स्कूल की ओर देखने लगा।

सेठ जी मोनू को उसे स्कूल को देखते हुए समझ गए। सेठ जी ने मोनू से पूछा बताओ मोनू उस स्कूल से जरूर तुम्हारी कोई ख्वाहिश है बताओ मुझे।

मोनू ने सेठ जी को बताया कि उसका एक सपना था कि उसका बेटा बड़े स्कूल में पढ़े परंतु उसकी हैसियत ना होने के कारण वह उसे नहीं पढ़ा सकता।

इसके बाद सेठ जी उस मोनू को स्कूल के अंदर ले गए और उन्होंने उसके बच्चे का उसी स्कूल में दाखिला करवाया बाहर दोनों हंसते हुए आए इसके बाद बाहर आने पर सेठजी ने मोनू से कहा कि अब तुम अपने बेटे की पढ़ाई का चिंता मत करो उसके जीवन भर की पढ़ाई का खर्चा मैं उठाऊंगा।

मोनू बहुत प्रसन्न हुआ और उसने सेठ जी का अभिवादन किया।

शिक्षा - ईमानदारी का परिणाम हमेशा अच्छा होता है।


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