फांसी से वापसी - Akbar Birbal Hindi Stories

Akbar Birbal Story In Hindi

Today I am going to tell you one another story of famous Akbar And Birbal.

Akbar Birbal Stories are so much famous because they are so much interesting and learnable also.

So enjoy this interesting akbar birbal stories in hindi.

फांसी से वापसी ( Akbar Birbal Hindi Stories)

Akbar Birbal Stories in Hindi

एक बार की बात है अकबर और उनकी पत्नी एक कमरे में बैठकर एक दूसरे से वार्ता कर रहे थे। तभी अकबर की पत्नी ने कहा की मैंने आपको हमेशा बीरबल की तरफदारी करते ही देखा है।

अकबर ने कहा बीरबल मेरे सबसे होशियार वजीरो में से एक है या फिर यह करो कि वह सबसे होशियार वजीर है। इसलिए मैं उसकी प्रशंसा करता हूं। तुम तो जानती हो कि एक राजा को अपने होशियार वजीर पर कितना निर्भर रहना पड़ता है।

अकबर की पत्नी ने कहा- " आप तो जानते ही हैं कि मेरा भाई मानसिंह भी बहुत होशियार है। परंतु आप उसकी प्रशंसा नहीं करते हैं। "

राजा ने कहा - " मैं जानता हूं कि मानसिंह तुम्हारा भाई है और वह काफी होशियार भी है लेकिन बीरबल उससे भी अधिक होशियार है।"

राजा की पत्नी ने कहा - " आप एक बार मानसिंह को अपनी होशियारी दिखाने का मौका दीजिए वह बीरबल से अधिक तो नहीं परंतु यह जरूर साबित कर देगा कि वह बीरबल इतना होशियार है।"

राजा अकबर ने कहा - " ठीक है हम कल ही उन दोनों को एक दौरे पर भेजते हैं और तुम देखना बीरबल की होशियारी के वजह से ही वह दोनों वापस आएंगे।"

रानी ने कहा - " ठीक है आप दोनों को दौरे पर भेजिए देखा जाए कि कौन ज्यादा होशियार है?"

राजा ने कहा- " मैं कल ही दोनों बीरबल और मानसिंह को ईरान के दौरे पर भेजता हूं।"

रानी ने पूछा - " आप इन दोनों को ईरान के दौरे पर क्यों भेज रहे हैं।"

राजा ने कहा- " यह तो तुम्हें उन दोनों के वापस आने पर ही पता चलेगा।" इसके बाद राजा उस कमरे से बाहर निकले और अपनी सभा बुलाई।

अकबर ने दोनों को बुलाया और कहां कि "हम चाहते हैं आप दोनों मानसिंह और बीरबल ईरान का दौरा करें। हम ईरान के राजा के लिए कुछ तोहफे भी भिजवा ना चाहते हैं। इसलिए हम चाहते हैं कि हमारे सबसे बुद्धिमान वजीर ईरान जाए।"

मानसिंह ने कहां - " हम दोनों को यह मौका देने के लिए धन्यवाद।"

इसके बाद बीरबल ने राजा से पूछा- " कि हम दोनों को यात्रा कब शुरू करनी होगी।"

राजा अकबर ने कहा- " हम चाहते है कि आप दोनों ईरान की यात्रा आज ही शुरू करें क्योंकि मुझे ईरान के राजा को एक महत्वपूर्ण पैगाम भी भेजना है।"

इसके बाद बीरबल और मानसिंह दोनों ही अपने घोड़ों पर सवार होकर ईरान के लिए निकल चले।

ईरान पहुंचने के बाद वह दोनों ईरान के राजा के महल पहुंचे वहां मानसिंह ने अपना परिचय देते हुए कहां " कि हम दोनों राजा अकबर के दूत हैं। मेरा नाम मानसिंह है और यह बीरबल है।"

ईरान के राजा ने कहा - " मेरा भाग्य है कि मेरे मित्र अकबर के दूत मेरे राज्य में उपस्थित हैं। मैं आप दोनों से परिचित हूं और मैं यह भी जानता हूं कि मानसिंह जी आप राजा अकबर के रिश्तेदार हैं और बीरबल की बुद्धिमानी के चर्चे तो मेरे महल में भी प्रसिद्ध है।"

इसके बाद मानसिंह ने कहा - " हम लोग आपके लिए राजा का एक पैगाम लेकर आए हैं।"

मानसिंह ने पैगाम राजा को दिया। ईरान के राजा उस पैगाम को पढ़कर आश्चर्यचकित हो गए।

उन्होंने अपने वजीर से कहा की - " मुझे अकबर द्वारा भेजे गए इस पैगाम पर विश्वास नहीं हो रहा है। वह चाहता है कि मैं इन दोनों को फांसी दे दूं। "

ईरान-ए-राजा के वजीर ने कहा - "मुझे लगता है महाराज ने को यहां पर फांसी देने के लिए इसलिए कहा ह क्योंकिै उन्हें डर है की अगर इन दोनों को फांसी वह अपने राज्य में देते तो विद्रोह हो सकता था। यह दोनों अपने राज्य में काफी लोकप्रिय हैं।"

इसके बाद मानसिंह ने कहा - " हम लोग आपके लिए राजा का एक पैगाम लेकर आए हैं।"

मानसिंह ने पैगाम राजा को दिया। ईरान के राजा उस पैगाम को पढ़कर आश्चर्यचकित हो गए।

उन्होंने अपने वजीर से कहा की - " मुझे अकबर द्वारा भेजे गए इस पैगाम पर विश्वास नहीं हो रहा है। वह चाहता है कि मैं इन दोनों को फांसी दे दूं। "

ईरान-ए-राजा के वजीर ने कहा - "मुझे लगता है महाराज ने को यहां पर फांसी देने के लिए इसलिए कहा ह क्योंकिै उन्हें डर है की अगर इन दोनों को फांसी वह अपने राज्य में देते तो विद्रोह हो सकता था। यह दोनों अपने राज्य में काफी लोकप्रिय हैं।"

इसके बाद राजा ने अपने सैनिकों को आदेश दीया की वह बीरबल और मानसिंह दोनों को कारावास में बंद कर दें। कल दोनों को फांसी दी जाएगी।

यह सुनकर मानसिंह कहने लगे की हमारा गुनाह क्या है हमें फांसी क्यों दी जा रही है।

ईरानी राजा ने कहा - " मुझे लगता है आप दोनों अपनी गलती से परिचित होंगे। आप लोग जो पैगाम लेकर आए है उसमें यही लिखा है कि आप दोनों को फांसी दे दी जाए।"

मानसिंह ने कहा- " महाराज जरूर कुछ गलत फहमी हुई है हमारी राजा हमें फांसी क्यों दिलवाना चाहेंगे हम दोनों सबसे चाहिता वजीर है।"

सिपाही बीरबल और मानसिंह दोनों को ले जाकर जेल में बंद कर दिए। मानसिंह वहां से बचने के  उपाय सोचने लगे तभी उन्होंने देखा की बीरबल चुपचाप बैठा हुआ है।

मानसिंह ने बीरबल से कहा- " तुम यहां चुपचाप बैठे हुए हो कल हम दोनों को फांसी होने वाली है बचने के कुछ उपाय सोचो। राजा जब फांसी की बात बता रहे थे तब भी तुमने कुछ नहीं बोला।"

बीरबल ने कहा-" मानसिंह जी आप परेशान मत होइए कल हम दोनों लोग सही सलामत आजाद होंगे। बस मैं यह सोच रहा हूं कि आखिर महाराज अकबर ने ऐसा उस पैगाम में लिखा क्यों?"

इसके बाद बीरबल ने मानसिंह के कानों में उन्हें अगले दिन कैसे वहां फांसी से बचना है इसकी प्लानिंग बताएं।

अगले दिन जब मानसिंह और बीरबल को फांसी वाले स्थान पर ले जाया गया। दोनों बहुत खुशी खुशी फांसी के स्थान पर गए।

बीरबल ने कहा - " पहले मुझे फांसी दीजिए आप लोग मैं राजा का प्रिय हूं।"

मानसिंह ने कहा - " मैं राजा का रिश्तेदार हूं इसलिए पहले मुझे फांसी दीजिए।"

बीरबल ने पुनः कहा - " आप राजा के रिश्तेदार हैं तो क्या हुआ पहले मैंने दरख्वास्त की है और मैं राजा का सबसे प्रिय वजीर भी हूं इसलिए पहले मुझे फांसी दिजिए।"

इस प्रकार बीरबल और मानसिंह दोनों पहले फांसी पाने के लिए लड़ने लगे। यह देख कर ईरानी राजा और उनके सभी वजीर बहुत ही आश्चर्यचकित हुए।

ईरानी राजा ने दोनों से पूछा की - " आप दोनों फांसी पाने के लिए इतना लड़ क्यों रहे हैं। क्या आप दोनों को मरने से कोई डर नहीं लगता।"

बीरबल ने उत्तर दिया - " ऐसी बात नहीं है हम दोनों को मरने से तो डर लगता है लेकिन हमारे राजपुरोहित ने बताया है आज जिसको भी पहले फांसी मिलेगी वह इरान का राजा बनेगा और जिसे दूसरे नंबर पर फांसी मिलेगी वह ईरान का प्रधानमंत्री।"

ईरान के राजा, मंत्री एवं वजीर सब लोग यह सुन कर आश्चर्यचकित हो गए और सोचने लगे की क्या यह सत्य है।

ईरानी राजा ने पूछा - " यह सब झूठ है हम तुम्हारी बातों पर कैसे विश्वास कर ले।"

मानसिंह ने कहा - " हमारे राजपुरोहित द्वारा कही गई आज तक कोई भी बात गलत नहीं हुई है। वह बहुत ही ज्ञानी है और वह जो भी कहते हैं वह सत्य होता है।"

इसके बाद राजा और वजीर सोचने लगे कि अगर इन दोनों को फांसी दे दी गई तो अगले जन्म में यह दोनों यहां के राजा और प्रधानमंत्री बन जाएंगे।

काफी देर तक सोचने के बाद ईरानी राजा ने कहा की - " हम अपना फैसला बदलते हैं आप दोनों को फांसी नहीं दी जाएगी आप राजा अकबर के लिए हमारी ओर से एक पैगाम लेकर जाइए।"

यह सुनकंर मानसिंह और बीरबल दोनों बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने ईरानी राजा का शुक्रिया अदा किया। इसके बाद वह इरानी राजा का पैगाम लेकर वापस अकबर के राज्य की ओर निकल पड़े।

अकबर के महल में पहुंचने पर अकबर मानसिंह और बीरबल को देख कर बहुत ही प्रसन्न हुए।

उन्होंने बीरबल और मानसिंह से पूछा की - " आप दोनों लोगों की यात्रा कैसी थी।"

बीरबल ने कहा बहुत अच्छी थी महाराज।

इसके बाद राजा ने पूछा की - " अब हमें यह बताइए कि आप दोनों लोग इस मुसीबत से बाहर कैसे निकले।"

मानसिंह ने बोला- " पहले यह बताईए की हमारी गलती क्या थी हम दोनों को उस मुसीबत में डाला क्यों गया था।"

राजा अकबर ने कहा कोई गलती नहीं थी बस हम आप दोनों की एक परीक्षा लेना चाहते थे।

इसके बाद मानसिंह ने बोला की हम दोनों बीरबल की बुद्धिमानी की वजह से ही यहां पर उपस्थित हैं। मानसिंह ने राजा को पूरी बात बताई।

राजा बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा कि पता था कि बीरबल अपनी बुद्धिमानी से जरूर इस मुसीबत का भी कोई ना कोई हल निकाल लेगा और तुम दोनों यहाँ पर सकुशल पहुंच जाओगे।

राजा ने अपनी पत्नी को भी बुलाया और उसे पूरी कहानी बताएं। महारानी भी यह सुन कर बहुत ही प्रसन्न हुई और वह भी अब बीरबल की बुद्धिमानी को मान गई।

Hope you like this hindi story and learn from it. Let's meet you again with some new stories in the next article.

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