10+ Moral Stories In Hindi For Kids- बच्चों के लिए हिंदी कहानियां

Moral Stories In Hindi

Moral Stories in Hindi

Nowadays Moral Stories are so much useful for childrens to keep them learning at a very small age. So Today we had written best moral stories in hindi for kids with morals also.

So below are the top 10 hindi moral  stories. Let's start

1.कुत्ता और तोता (Moral Story In Hindi)

Story for kids in hindi

एक तोता था। वह एक पेड़ पर रहता था। उसे अमरूद बहुत पसंद थे। एक दिन वह पेड़ की डाली पर बैठा अमरुद खा रहा था। अचानक अमरूद उसके पंजों से छूट कर नीचे गिर पड़ा। अमरूद उठाने के लिए उड़ते हुए नीचे जमीन पर आया।


पेड़ के पास एक कुत्ता भी रहता था। अमरूद के पेड़ से गिरने की आवाज सुनकर वह दौड़ता हुआ आया।अब तोता और कुत्ता आमने-सामने थे। कुत्ता गुर्रा ने लगा। 

तोता मीठी आवाज में बोला " कुत्ता भाई , हम दोनों आपस में मित्रता कर लेते हैं। दोनों एक दूसरे की मदद करेंगे और आनंद से रहेंगे।"


कुत्ता बोला, " ठीक है ,मेरी जाति की वफादारी को तो तुम जानते ही हो।


कुछ दिन बाद तोते की कौवे से लड़ाई हो गई। दोनों आकाश में उड़ते हुए एक दूसरे पर हमला कर रहे थे। कुत्ता नीचे जमीन पर बैठा दोनों की लड़ाई देख रहा था। 

कुछ देर बाद तोता घायल होकर के नीचे जमीन पर गिर पड़ा। उसने पीड़ा से कराते हुए कहा-" कुत्ता भाई, तुमने अच्छी दोस्ती निभाई। क्या तुम्हें मेरी मदद नहीं करनी चाहिए थी?"


कुत्ता बोला- "  इसमें मेरी कोई गलती नहीं है। भगवान ने मुझे आकाश में उड़ने की शक्ति नहीं दी, इसलिए मैं तुम्हारी मदद के लिए नहीं आ सका।" 


तोता बोला- " तुम्हारी बात सही है मुझे ही समझ में नहीं आया कि हमेशा समान गुणों वाले व्यक्ति से मित्रता करनी चाहिए।

शिक्षा-  समान गुण वाले व्यक्तियों से ही मित्रता करनी चाहिए।



2.कौआ कान ले गया ( Moral Stories In Hindi For Kids)


बहुत समय पहले की बात है। चंदनवन में दो चरवाहे अपनी गायों को चरा रहे थे। उसी समय  एक चरवाहे के मन में शरारत सूझी। 


उसने दूसरे चरवाहे से बोला - " देख,  तू देखता रह गया और कौवा तेरे कान ले गया।"  संयोग से उसी समय पेड़ पर बैठा हुआ कौवा उड़ा। 


दूसरा चरवाहा उस कौवे के पीछे  चिल्लाते हुए दौड़ा। वह कह रहा था -- " कौवा मेरे कान ले गया। कोई मेरी मदद करो। भगवान के लिए मेरी मदद करो। " 


उसकी करुण पुकार एक महात्मा जी को सुनाई दी जो , उसी जंगल में रहते थे। उन्होंने मन ही मन सोचा ,  कौवा कहीं किसी के कान ले जाता है? फिर भी वह मदद के लिए आए। उन्होंने पास आकर जब उस चरवाहे को देखा,   तो देखते हैं कि उसके दोनों कान तो सलामत हैं।


महात्मा जी ने फिर उस चरवाहे से पूछा - " अरे बच्चा!  कौवा किसके कान ले गया ? "


"मेरे" ,दूसरे चरवाहे ने उत्तर दिया।


"तुम्हें किसने कहा कि तुम्हारे कान कौवा ले गया है?  तुम्हें गलतफहमी हुई है।" चरवाहा बोला - " मेरे साथी ने मुझे बताया है।"


महात्मा जी हंसते हुए बोले -- " तुम दौड़ने से पहले अपने कान टटोलकर देख तो लेते। तुम्हारे दोनों कान अपनी जगह सलामत हैं।


 तुम्हारे जैसे के लिए ही लोग कहते हैं -   बेवकूफ के सिर सींग नहीं होते , अपने व्यवहार से ही पहचाने जाते हैं।

शिक्षा - हमें बिना सोचे समझे किसी भी बात पर विश्वास नहीं करना चाहिए।



3. क्रिसमस ( Hindi Moral Stories )

Kids hindi story

क्रिसमस ईसाइयों का प्रमुख त्यौहार है। यह 25 दिसंबर को धूमधाम से मनाया जाता ह। इस दिन ईसा मसीह का जन्म हुआ था। ईसा मसीह की माता का नाम मेरी तथा पिता का नाम जोसफ था। एक बार जोेसफ को जनगणना कराने के लिए बेथलेहम जाना पड़ा। रात बिताने के लिए वे एक अस्तबल में ठहर गए। उसी अस्तबल में मेरी ने एक बालक को जन्म दिया। माता-पिता ने इस बालक का नाम जीसस रखा। यही बालक बड़ा होकर ईसा मसीह के नाम से प्रसिद्ध हुआ। ईसा मसीह ने मानव समाज को भाईचारे का संदेश दिया था। वे लोगों को एक दूसरे से प्रेम करने के लिए प्रेरित करते थे। उनका कहना था कि मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म प्रेम एवं क्षमा है। क्रिसमस के अवसर पर ईसा मसीह के अनुयायी उन्हें याद करते हैं। वे उनका जन्मदिन हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। इस दिन गिरजाघरों की सजावट देखने लायक होती है। वहां लोगों की खूब भीड़ होती है। लोग अपने घरों को भी खूब सजाते हैं। घर में ' क्रिसमस- ट्री ' जरूर बनाया जाता है। लोग एक-दूसरे को उपहार देते हैं। वृद्ध व्यक्ति के वेश में सांता क्लास भी लोगों को उपहार बांटते हैं।

शिक्षा- मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म प्रेम एवं क्षमा है।



4. पेड हमारे मित्र ( Moral Stories In Hindi)

Moral Short Stories

आज बाल दिवस के अवसर पर हमारी स्कूल की छुट्टी थी। मैं घर से बाहर निकली तो देखा- पार्क में लोगों की भीड़ लगी है। भीड़ के साथ कॉलोनी के बच्चे भी थे।

वहां जाकर मुझे पता चला कि वृक्षारोपण का कार्यक्रम चल रहा है। बहुत खुशी हुई और मैं भी कार्यक्रम में शामिल हो गई। कुछ समय बाद कॉलोनी के प्रधान जी आए। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा - " इस बार हम बच्चों से पार्क में पौधे लगवाएंगे। बच्चे अपने-अपने पौधे को बढ़ता हुआ देखेंगे और इससे उन्हें बहुत खुशी होगी।" प्रधान जी ने सब बच्चों को एक-एक पौधा दिया। मालती को नीम का पौधा मिला, जतिन को जामुन का पौधा दिया गया, मुझे अमरूद बहुत पसंद है इसलिए मैंने अमरूद का पौधा उठा लिया। इसी प्रकार अन्य बच्चों को भी पौधे दिए गए। प्रधान जी ने सब बच्चों से कहा- " पेड़ हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी है। यह हमारे मित्र होते हैं। मीठे मीठे फल तो मिलते ही हैं, यह हमें ऑक्सीजन गैस भी प्रदान करते हैं, जिसके बिना हम जीवित नहीं रह सकते।" इसके बाद बच्चों ने अपना-अपना पौधा लगाया। बच्चों मे बहुत उत्साह था। मैं बार-बार तालियां बजा रहे थे। मैंने भी अपना पौधा लगाया। उस समय मुझे बहुत खुशी हो रही थी।

शिक्षा- हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए।


5. सच्चा सुख ( Short Moral Stories)


एक बार की बात है ,एक व्यक्ति ने अपने बेटे को ₹10 देकर कहा, "मोहन बाहर सड़क पर एक फल वाला खड़ा हुआ है जाओ, कुछ फल ले आओ, मुझे भगवान को भोग लगाना है।" मोहन रुपए लेकर घर से बाहर निकला। उसने सोचा कि ₹5 के अमरुद खरीदने चाहिए और ₹5 के केले। अमरूद और केले के भोग से भगवान जरूर खुश होंगे। उसने ऐसा ही किया। वह फल खरीद कर वापस आ रहा था, तभी उसने सड़क किनारे एक भिखारी देखा। भिखारी भूख से तड़प रहा था। मोहन को उस पर दया आ गई। उसने भगवान के भोग के लिए खरीदे हुए सारे फल भिखारी को दे दिए। फल लेते हुए भिकारी बहुत खुश था और बार-बार मोहन का आभार प्रकट कर रहा था। खुश देखकर मोहन को भी अद्भुत आनंद की प्राप्ति हो रही थी। मोहन खाली हाथ घर पहुंचा तो पिताजी नाराज होते हुए बोले," फल क्यों नहीं लाया ? क्या रुपए कहीं खो दिए?" मोहन ने पिता को सारी बात सच बता दी। ओ बेटे के इस कार्य से आश्चर्य हुआ। उन्होंने कहा, " आप मेरी पूजा तो अधूरी रह गई, पर देकर तुझे क्या मिला?" " इससे मुझे सच्चा सुख मिला, पिताजी," मोहन ने उत्तर दिया। बेटे का उत्तर सुनकर पिता गदगद हो गए।

शिक्षा - परोपकार करने से मनुष्य को सच्चे आनंद की प्राप्ति होती है।

Moral Stories In Hindi



6. दुष्ट पर दया

एक गांव के बाहर झोपड़ी में एक साधु रहता था। ठंड के दिन थे। कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। साधु जंगल से लकड़ियां लाने के लिए झोपड़ी से बाहर निकला। वह दो तीन कदम ही आगे बढ़ा था उसकी नजर एक सांप पर पड़ी। सांप ठंड के कारण सिकुड़ कर बैठा हुआ था। साधु ने उसे एक लकड़ी से हिलाने का प्रयास किया, ताकि वह बिल में छुप कर ठंड से बच सकें। सांप ने केवल एक बार आंखें खोलकर देखा और बेसुध होकर पडा रहा। साधु से सांप की हालत देखी नहीं गई। उसे सब पर दया आ गई। वह सांप को उठाकर अपनी झोपड़ी में ले आया। उसने साफ के लिए लकड़ियां जलाईं। आग की गर्मी से सांप की चेतना लौटने लगी। कुछ ही देर बाद उसने जमीन पर रेंगना शुरू कर दिया। सांप की हालत में सुधार देखकर साधु बहुत खुश हुआ। वह जीव की जान बचाने में सफल रहा था। परंतु उसे पता नहीं था कि दुष्ट पर दया करने से अपनी हानि हो सकती है। अचानक सांप ने अपना फन उठाया और उसने साधु को डस लिया। कुछ ही देर बाद पीड़ा से तड़पते हुए साधु की मौत हो गई।

शिक्षा- हमें किसी की मदद सोच विचार कर करनी चाहिए।



7. चिडियाघर की सैर

Moral Stories For Kids

मेरा नाम तान्या है। मुझे पशु पक्षियों से बहुत प्यार है। घर में एक पालतू बिल्ली है। मैं खाली समय में उसके साथ खेलती हूं। मैं अपने स्कूल की किताबों में पशु पक्षियों के चित्र देखकर बहुत खुश होती हैं।

माताजी मेरी रुचि को जानती हैं। इसलिए उन्होंने पिताजी से कहा कि इस बार छुट्टी के दिन दिल्ली का चिड़ियाघर देखने चलेंगे। अगले रविवार को हम सब चिड़िया घर पहुंच गए।

चिड़िया घर के पास ही पुराना किला। वहां लोग झील में बोटिंग कर रहे थे। पिताजी ने कहा कि पहले चिड़ियाघर देख लेते हैं, बाद में समय बचा तो बोटिंग करेंगे। हमने टिकटें खरीदी और अंदर चले गए।

दिल्ली का चिड़िया घर काफी दूर तक फैला हुआ है। चारों ओर पेड़ पौधे हैं। वहां मैंने रंग बिरंगे पक्षी देखें। पेड़ों के आसपास तालाब बने हुए हैं, बगुले और बत्तखें तैर रही थी। कुछ पक्षी बड़े बड़े पिंजरो में बंद थे। मैंने वहां बड़े आकार के तोते भी देखें।

आगे बढ़ने पर मुझे पिंजरे में बंद बाघ और शेर दिखाई दिए। शेर को इतने निकट से देखकर मैं तो डर ही गई। हम कुछ और आगे बढ़े तो हमें विशाल गैंडा नजर आया।

एक तालाब के किनारे बड़े-बड़े मगरमच्छ धूप सेंक रहे थे। कुछ और आगे बढ़ने पर हमें कंगारू नजर आया। ऑस्ट्रेलिया के इस जानवर को देखकर हमें बहुत खुशी हुई।

काफी देर पैदल घूमने के बाद मेरे पैरों में दर्द होने लगा। मैंने पिताजी से वापस चलने के लिए कहा। उन्होंने मेरी बात मान लिया और हम वापस लौट आए।

शिक्षा- हमें पशु-पक्षियों से प्रेम करना चाहिए।


Moral Stories In Hindi For Kids


8. लालच का फल ( Short Moral Stories)


खड़कपुर गांव में एक पंडित जी रहते थे। उनके पास एक गाय थी। गाय रोज 5 लीटर दूध देती थी। इस दूध को बेचकर पंडित जी अपनी गुजर-बसर करते थे।

पंडित जी अपनी गाय को रोज जंगल में चराने ले जाते थे। जंगल में पंडित जी की गाय मुफ्त का हरा चारा खाती थी इस प्रकार दोनों की सैर भी हो जाती थी।

एक बार की बात है, पंडित जी दोपहर बाद अपनी गाय को जंगल में चराने ले गए। उन्होंने गाय को चढ़ने के लिए छोड़ दिया और खुद एक पेड़ के नीचे विश्राम करने लगे। लेकिन पंडित जी बीच-बीच में उठकर गाय को भी देख लेते थे कि कहीं वह दूर ना निकल जाए।

तभी उन्होंने दूर खड़ी एक लावारिस गाय को देखा। पंडित जी के मन में लालच आ गया। उन्होंने सोचा कि यदि उनके पास दो गाय हो जाएं तो उनकी ज्यादा कमाई हो सकती है।

पंडित जी लावारिस गाय के गले में बांधने के लिए रस्सी ढूंढने लगे। वे काफी देर तक रस्सी खोजते रहे। तभी उन्हें एक पेड़ पर लटकी रस्सी दिखाई दी। पंडित जी रस्सी को देखकर बहुत खुश हुए।

उन्होंने जल्दी से पेड़ पर चढ़कर रस्सी उतारी। लेकिन जब तक वे रस्सी लेकर गाय के स्थान पर पहुंचे तब तक गाय वहां से जा चुकी थी।

पंडित जी पूरे जंगल में लावारिस गाय को खोजते रहे,पर वह उन्हें कहीं दिखाई नहीं दी। अचानक उन्हें अपनी गाय का ध्यान आया। अब वह अपनी गाय को खोजने लगे। जंगल में अंधकार छाने लगा।

पंडित जी को अपनी गाय कहीं नहीं दिखाई दी। चारों ओर अंधेरा छा गया था। पंडित जी अपने सिर पकड़कर रोने लगे-" हाय! यह मैंने क्या कर दिया। दूसरी गाय के लालच में अपनी गाय भी गवा बैठा।"

शिक्षा- लालच का फल सदा बुरा होता है।


9. अनजान की मदद


एक बूढ़ा गांव से शहर जा रहा था। उसके हाथ में भारी बक्सा था। रास्ता कच्चा था, इसलिए उसे पैदल चलने में कठिनाई हो रही थी। तभी वहां एक घुड़सवार आया।

बूढ़े ने घुड़सवार से बक्सा घोड़े पर रखने का निवेदन किया। लेकिन उसने साफ मना कर दिया-" मैं तुम्हारा बोझ क्यों उठाऊं? मैं तुम्हारा नौकर हूं क्या?"

घुड़सवार आगे बढ़ गया। बूढ़ा कोई देर विश्राम करने के लिए एक पेड़ के नीचे बैठ गया। अचानक उसने विचार किया कि यदि घुड़सवार उसका बक्शा घोड़े पर रखने के लिए मान जाता, तो शायद उसे नुकसान हो जाता है।

घुड़सवार उसका बक्सा लेकर भाग भी सकता था। अच्छा हुआ घुडसवार ने उसकी मदद करने से मना कर दिया।

उधर आगे जाकर घुड़सवार ने भी विचार किया कि उसे बूढ़े का बक्सा घोड़े पर रख कर भाग जाना चाहिए था, बक्से में जरूर कुछ सोना चांदी रुपए पैसे आदि होंगे।

वह वापस लौट कर बूढ़े के पास आया। उसने बूढ़े से कहा कि वह उसकी मदद करना चाहता है। तभी बूढ़े के दो बेटे गांव से उसके पास आए।

 उन्होंने घुड़सवार से कहा कि उनके पिता की मदद करने के लिए उनके बेटे अभी जिंदा है।

घुड़सवार निराश होकर वापस चला गया। बूढ़े ने अपने बेटे को पूरी कहानी बताई और कहा - " बेटा, हमें किसी अजनबी से मदद नहीं लेनी चाहिए।"

शिक्षा- हमें अनजान व्यक्ति पर भरोसा नहीं करना चाहिए।


10. कौए की दयालुता




एक बार की बात है एक कौवा जंगल के ऊपर से उड़ता हुआ अपने घर को जा रहा था। उसने अपने चोच में रोटी का टुकड़ा दबाए रखा था।

वह बहुत खुश था मुझे आज खाना मिल गया अपने घर पर जाकर इस खाने को खा सकूंगा। 

जंगल के ऊपर से उड़ते उड़ते वह काफी थक गया था। उसे काफी प्यास भी लग रही थी। वह पानी की खोज में भटकता रहा।

तभी उस कौवे को पानी का घड़ा दिखाई दिया। उसने सोचा अब मैं पानी पी सकूंगा।

कौवा पानी के घड़े के पास गया। वह पानी पीने ही वाला था की तभी वहां पर एक साधु आ गए। 

साधु भी काफी थके हुए थे वह एक लंबी पग यात्रा करके कैलाश पर्वत से लौट रहे थे। साधु को भी काफी प्यास और भूख लगी हुई थी।

साधु और कौवा दोनों को पानी पीना था परंतु घडे में पानी की मात्रा काफी कम थी।

कौवा बहुत दयालु था उसने वह पानी साधु को दे दिया और कहा की आप इस पानी को पी लीजिए।आप काफी लंबी पदयात्रा करके आए हैं। 

मुझे तो उड़ कर जाना है मैं तो कहीं भी पानी पाकर पी लूंगा। साधु उस कौवे की दयालुता से काफी प्रसन्न हुए।

अचानक एक तेज प्रकाश हुआ और साधु एक भगवान के रूप में परिवर्तित हो गए। 

भगवान जी ने कहा - "  तुमने मेरी मदद की है तुम बहुत दयालु हो इस धरती पर तुम्हारे जैसे जीवों की आवश्यकता है। "

भगवान जी ने उस कौवे से प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया की आज के बाद वह धरती लोक में नहीं बल्कि स्वर्ग लोक में भ्रमण करेगा।

कौवा बहुत प्रसन्न हुआ और उसने आभार प्रकट किया।

शिक्षा -  दूसरों की मदद करने का फल हमेशा अच्छा ही होता है चाहे वह दूसरा आदमी कोई भी हो।


Hope you all like all the above moral stories in hindi. Keep Reading other moral story in hindi also.

Meet you again with some interesting hindi stories till then good bye and keep learning.

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1 Comments

  1. Bahut hi achi kahaniyan hai aise kahaniyon ke liye dhanyawad

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