Akbar Birbal Stories In Hindi - अकबर बीरबल की कहानियां

Akbar Birbal Stories In Hindi

Akbar and Birbal Stories

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Akbar And Birbal Story

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एक बार महाराज अकबर के दरबार में एक सैफुल्लाह नामक किसान आया। महाराज ने उससे पूछा - " बताओ क्या बात है तुम यहां क्यों आए हो। "

सैफुल्ला ने बताया की 6 महीने पहले उसकी बीवी मर चुकी है। इसलिए वह बहुत निराश रहता था।

महाराज ने बोला - " तुम्हारी पत्नी का देहांत हो गया है यह सुनकर मुझे बहुत बुरा लगा।"

इसके बाद सैफुल्ला ने बताया कि उसकी बीवी के मर जाने के बाद उस जीने कीे इच्छा नहीं रहती थी। वह बहुत गुमसुम और परेशान रहता था। फिर एक दिन रास्ते में वह जा रहा था उदास होकर तभी उसे काजी मिले।

काजी ने सैफुल्लाह से पूछा - " क्या हुआ तुम इतने उदास क्यों हो? " 

सैफुल्लाह ने बताया की अब मेरे जीने का कोई मकसद नहीं है मैं बहुत अकेला हूं।

काजी ने सैफुल्लाह से बोला ऐसा मत बोलो तुम अजमेर जाओ वहां जाने पर तुम्हें जीने का कोई ना कोई मकसद जरूर मिल जाएगा।

सैफुल्ला ने काजी की बात मान ली और वह अजमेर जाने के लिए तैयार हो गया। उसने बोला की अजमेर जाने पर अल्लाह मुझे जरूर जीने का कोई मकसद बताएगा।

सैफुल्लाह अपने घर गया और वह अगले दिन अजमेर जाने के लिए तैयारी करने लगा। वह रात में सो नहीं पाया क्योंकि वह सोच रहा था की मैं अपने पूरे जीवन की जमा की गई  पूजी किस पर विश्वास करके दूं। जो इसे मेरे अजमेर से आने तक संभाले।

अगले दिन जब वह अजमेर जाने के लिए घर से निकला तो वह काजी के घर गया। वहां जाकर सैफुल्ला ने काजी से बोला की - " क्या आप मेरे अजमेर से आने तक मेरे इस जमा पूंजी को रख सकते हैं।"

काजी ने कहा ठीक है मैं इसे रख लूंगा लेकिन पहले तू पोटली पर मोहर लगा दो।

सैफुल्ला ने ऐसा ही किया उसने मुहर लगा दी और काजी को थैला दे दिया इसके बाद वह अजमेर के लिए निकल गया।

कुछ दिन बाद जब वह अजमेर से लौटा तो उसे अपने जीने का मकसद मिल गया था। उसने कहा कि अब मैं बच्चों को कुरान शरीफ पढाऊंगा। मेरी जमा की हुई पूजी से मेरा बुढापा कट ही जाएगा।

इसके बाद वह काजी के यहां गया उसने काजी को बताया कि उसे अब अपने जीने का मकसद मिल गया वह बच्चों को कुरान शरीफ पढ़ाएगा। इसके बाद उसने काजी से अपनी दी हुई पोटली मांगी।

काजी ने उसे पोटली ला कर दी और कहा कि "सैफुल्ला तुम देख लो की मोहर ठीक है कि नहीं।"

सैफुल्ला ने मोहर देखी और कहां काजी साहब यह ठीक है अब मैं घर चलता हूं।

घर पर आने के बाद जब सैफुल्ला ने उस पोटली को खोला और उसमें से अपने जमा किए हुए सोने के सिक्के निकाला तो वहां पर सोने के सिक्के की जगह पत्थर निकले।

इसके बाद वह फिर काजी के पास गया। काजी ने सैफुल्ला को देखकर पूछा - " क्या हुआ सैफुल्ला बच्चों को पढ़ाने में कोई मदद चाहिए क्या?"

सैफुल्ला ने कहा जी को पूरी बात बताई। इसके बाद काजी ने ने कहा मतलब तुम मुझ पर चोरी का इल्जाम लगा रहे हो। यहां से चले जाओ और आज के बाद मुझे अपनी शक्ल मत दिखाना। तुम्हें झूठा इल्जाम लगाने के जुर्म में मैं तुम्हें गिरफ्तार करवा सकता हूं।

इसके बाद सैफुल्लाह ने राजा से कहा - "अब सिर्फ आप ही मेरी मदद कर सकते है।"

राजा ने कहा ठीक है मैं तुम्हारी मदद करूंगा लेकिन यह सोच लो तुम बहुत ही बड़ा संगीन आरोप लगा रहे हो अगर तुम झूठे पाए गए तो तुम्हें कारावास हो सकता है।

सैफुल्लाह ने कहा ठीक है राजा साहब मैं झूठ नहीं बोल रहा हूं।

इसके बाद राजा अकबर ने बीरबल से कहा की बीरबल क्या तुम इस मामले को सुलझा सकते हो।

बीरबल ने कहा हां मगर मुझे को थोड़ा समय लगेगा।

राजा अकबर ने कहा ठीक है तुम समय ले लो।

इसके बाद बीरबल ने सैफुल्ला से वह पोटली मांगी जो उसने काजी को दी थी। बीरबल ने उस पोटली को छूकर देखा और फिर से सैफुल्ला को दे दी।

उसके बाद बीरबल अपने घर गया उसने अपनी एक पोशाक ली और उसे फाड दिया।

इसके बाद उसने अपने नौकर को बुलाया और कहा कि यह मेरी पसंदीदा पोशाकों में से एक हैं। मुझे एक ऐसा दर्जी चाहिए जो इसे रफ्फू भी कर दे और यह पता भी ना चले कि यह सिली हुई है।

नौकर ने कहा ठीक है यह आप मुझे दे दीजिए। इसके बाद नौकर उस पोशाक को लेकर चला गया। अगले दिन वह पोशाक लेकर फिर बिरबल के पास आया ,  उसने पोशाक बीरबल को दी। 

बीरबल ने कहा -" बहुत अच्छा यह पोशाक तो रफु भी हो गई और पता भी नहीं चल रहा है की सिली हुई है।"

बीरबल ने अपने नौकर से पूछा कि आखिर यह होनहार दर्जी है कौन।

नौकर ने बताया कि उस दर्जी का नाम गोपाल है। बीरबल ने अपने नौकर से कहा कि उसे मुझसे आकर कल मिलने को कहो , मुझे और भी पोशाके ठीक करवानी है।

अगले दिन जब राजा की फिर से सभा लगी तो राजा ने बीरबल से पूछा - " तुमने सैफुल्लाह के मामले की जांच की क्या या तुम्हें और समय चाहिए?"

बीरबल ने कहा- " नहीं महाराज आप सैफुल्ला और काजी दोनों को तुरंत दरबार में बुला लीजिए।"

राजा ने अपने सिपाहियों को काजी और सैफुल्ला दोनों को तुरंत दरबार में बुलाने का आदेश दिया।

दोनों सैफुल्लाह और काजी दरबार में उपस्थित हुए। इसके बाद बीरबल ने सैफुल्ला से पूछा - " क्या यह वही थैली है जो तुमने काजी को दी थी।"

सैफुल्ला ने बीरबल को उत्तर दिया - " हां यह वही थैली है जो मैंने काजी को दी थी।"

इसके बाद बीरबल ने काजी से पूछा - " काजी साहब वही थैली है जो सैफुल्ला ने आपको दी थी ।"

काजी ने बोला - " हां यह वही थैली है जो सैफुल्ला ने मुझे दी थी और सैफुल्ला ने ही खुद इस थैली पर मोहर भी लगाई थी। बाद में यह आकर मुझसे कहने लगा कि इसमें सोने के सिक्के थे मैंने इस थैली को खोला ही नहीं तो मुझे कैसे पता होगा कि इस में क्या था।"

सब होने के बाद अब बीरबल ने महाराज से कहा कि "वह गोपाल दर्जी को बुलाने की आज्ञा दें।"इसके बाद गोपाल दर्जी दरबार में आया।

बीरबल ने गोपाल दर्जी से पूछा कि - "क्या तुम ने हाल ही में काजी का कोई काम किया है। "

गोपाल दर्जी ने उत्तर दिया - " हां कुछ दिनों पहले का काजी ने मुझसे अपनी एक फटे हुए थैले को सिलवाना था।"

बीरबल ने राजा को बताया कि "काजी ने वही थैली गोपाल से सिलवाए थी जो सैफुल्ला ने काजी को रखने के लिए दी थी। काजी ने उसमें से सोने के सिक्के निकाल दिए और फिर उसमें पत्थर भरकर गोपाल से सिल्वा दी।"

इसके बाद काजी महाराज अकबर के सामने हाथ जोड़ कर रोने लगा और कहने लगा "कि मुझे माफ कर दीजिए मुझसे गलती हो गई मुझे लालच हो गया था।"

राजा ने उसे दंड दिया और कहा कि तुम सैफुल्ला के चुराए हुए सिक्के उसे लौटा दो।

इस प्रकार बीरबल ने अपनी चतुराई का परिचय देते हुए राजा को पुनः खुश कर दिया। इसके बाद राजा ने बीरबल को इनाम दिया।

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